Fursat ke pal
Thursday, 20 September 2012
Sunday, 5 August 2012
आज मेरे अरमान भी उड़ रहे हैं उडती हुई पतंग की तरह लेकिन
जानती हूँ तुम मेरे अहसासों की डोर थामें खड़े हो मुंडेर पर छत की
डर जाती हूँ कहीं कोई आकर काट ना जाए मेरे अरमानो की पतंग
आ गिरें मेरे अरमान भी कटी पतंग की तरह ही जमीं पर
चरखी पकड़ाकर मुझे अपने संग ही खड़ा कर लेते हो तुम
मेरे चेहरे पर उतरते चढ़ते भावों को अच्छी तरह पढ़ लेते हो तुम
तुम हो की मेरे डर को बखूबी भांप लेते हो
पतंग को ऊँचे उड़ाना अच्छी तरह जानते हो तुम
मेरे अरमानो की डोर तुम कटने नहीं दोगे यह जानती हूँ
बसे हुए मेरे इस चमन को तुम उजड़ने नहीं दोगे मैं मानती हूँ
Wednesday, 4 July 2012
छोड़ कर जो चल दिए मुझे यूँ बीच राह में अकेले
क्या बिन मेरे तुम खुद अकेले जी पाओगे ??
बीते हुए कुछ नाजुक से पलों को साथ के अपने
क्या तुम अपनी यादों से भुला भी पाओगे ??
छाप दिया अक्स तुमने अपना मेरे इस जीवन पर
क्या उस अक्स को तुम धुंधला भी कर पाओगे ??
जब अंत यही था अपनी प्रेम कहानी का
तो मेरी जिंदगी में तुम आये ही क्यूँ थे ??
हसीं सपने दिखा मुझको तुम लुभाए ही क्यूँ थे ??
मैंने सुना था प्यार में दिल टूट भी जाया करते हैं
मेरा दिल यूँ टूटेगा सोचा ना था
मेरा सपना ही मुझसे छूटेगा सोचा ना था
सुना था दूरियां भी नजदीकियों का कारण बनती हैं कभी कभी
क्या हमारी ये दूरियां उसे मेरी याद दिलाएंगी ??
बीते पलों की प्यार से सिंचित बहारें क्या फिर से लौट कर आएँगी ??
अपनी इन्ही दूरियों को नजदीकियों में बदलने की चाह में
तुम्हारी पुजारन .........मैं
—
क्या बिन मेरे तुम खुद अकेले जी पाओगे ??
बीते हुए कुछ नाजुक से पलों को साथ के अपने
क्या तुम अपनी यादों से भुला भी पाओगे ??
छाप दिया अक्स तुमने अपना मेरे इस जीवन पर
क्या उस अक्स को तुम धुंधला भी कर पाओगे ??
जब अंत यही था अपनी प्रेम कहानी का
तो मेरी जिंदगी में तुम आये ही क्यूँ थे ??
हसीं सपने दिखा मुझको तुम लुभाए ही क्यूँ थे ??
मैंने सुना था प्यार में दिल टूट भी जाया करते हैं
मेरा दिल यूँ टूटेगा सोचा ना था
मेरा सपना ही मुझसे छूटेगा सोचा ना था
सुना था दूरियां भी नजदीकियों का कारण बनती हैं कभी कभी
क्या हमारी ये दूरियां उसे मेरी याद दिलाएंगी ??
बीते पलों की प्यार से सिंचित बहारें क्या फिर से लौट कर आएँगी ??
अपनी इन्ही दूरियों को नजदीकियों में बदलने की चाह में
तुम्हारी पुजारन .........मैं
Monday, 25 June 2012
चांदनी रात में नहाई हुई एक परी सी आती तुम मेरे ख्वाबों में
आज चांदनी रात है , मेरे ख्वाबों में नहीं तुम हकीकत में आना
कभी आकर चुपके से हौले से एक मीठा राग छेड़ जाती हो तुम
आज बैठ साथ में मेरे , प्यार में डूबी पूरी ग़ज़ल ही सुनाना
जब भी आती हो तुम पास मेरे छोड़ मुझको उदास कर जाती हो तुम
इस बार आई तो फिर कभी छोड़ कर ना जाना ......ओ मेरी जाना
सोते जागते बस तुम ही तुम हो ,चाहता हूँ उम्र भर मैं तेरा साथ निभाना
______________अंजना चौहान ______________
Monday, 28 May 2012
टूटी हुई आस बचाने को आजा
दिल में बसी याद मिटाने को आजा
अपनी मुहब्बत में बनाया था जो कभी हसीं ताजमहल
आ आज वही ईमारत गिराने को आजा
कभी मुझे जायदाद सी लगती थी मुहब्बत अपनी
प्यार की ईमारत में दरार आ जाएगी सोचा ना था
कभी हमने अपने आने वाले पलों को
झाड़ फानूस के गलीचों सा सजाया था
उन पर धूल जम जाएगी ,सोचा ना था
क्या मुमकिन नहीं उन्हें फिर से सजाना ?
क्या मुमकिन नहीं उन सपनो को फिर से बुन पाना ?
अगर नहीं, तो फिर तुम मेरी जिंदगी में आये ही क्यूँ ?
आये भी थे तो रूह में इस कदर समाये ही क्यूँ ?
क्या मुमकिन है रूह का शरीर से जुदा हो जाना ?
क्या मुमकिन है मेरा बिन तुम्हारे जी पाना ?
लेकिन जी रही हूँ सिर्फ एक आस लेकर
अपनी यादों के टूटे फूटे खंडहरों के साथ ...
तुम्हारे इंतज़ार में.... तुम्हारे प्यार में ..........
_____________अंजना चौहान ____________
Tuesday, 22 May 2012
मेरा एक पहला प्रयास .....
********************
तुम्हें चेहरा पढ़ लेने की आदत है
मुझे चेहरा छुपाने की आदत नहीं |
मेरे उन छुपे लफ़्ज़ों का क्या होगा
जो दिल में जज़्ब है पर इबादत नहीं |
जब तुम दिल के करीब ला सकते हो
क्यूँ दिल में समाने की इजाजत नहीं |
जो गर तेरा प्यार ही तेरी पूजा है
तो मेरा प्यार भी कोई शरारत नहीं |
तुझे नखरे दिखाने की आदत बहुत
मेरे नखरों में भी कम अदावत नहीं |
तेरे प्यार पाने को मर मिटे सनम
यह सिर्फ प्यार है कोई शहादत नहीं |
जब तुम दिल की जबाँ पढ़ लेते हो
हमें लफ्जों में कहने की आदत नहीं
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